शिवपुरी। शिवपुरी नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा का आज फिर एक नया सियासी ड्रामा देखने को मिला। नगर पालिका शिवपुरी के दवारा शहर के गुरू गोरखनाथ मंदिर पर गंगा दशहरा के अवसर पर गंगा संवर्धन अभियान का कार्यक्रम था। नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा नगर पालिका की मुखिया है और इसी कार्यक्रम मे नगर पालिका अध्यक्ष ने सियासी ड्राम रच दिया। कार्यक्रम मे अध्यक्ष ने अपना आपमान समझा और बीच कार्यक्रम मे मंच का त्याग कर कार्यक्रम छोड गई। मंच पर मौजूद मंत्री, प्रशासनिक अधिकारी और भाजपा नेताओं के बीच हुई इस घटना ने समारोह की भव्यता पर सवाल खड़े कर दिए।
कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के प्रभारी मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर, भाजपा जिला अध्यक्ष जसवंत जाटव, कलेक्टर अर्पित वर्मा और एसपी यांगचेन डोलकर भूटिया सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद थे। मंच पर अतिथियों का माल्यार्पण कर सम्मान किया जा रहा था, लेकिन इसी दौरान माहौल अचानक असहज हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा पूरे कार्यक्रम के दौरान नाराज दिखाई दीं। कुछ देर बाद वह अचानक मंच से नीचे उतरीं और कार्यक्रम स्थल छोड़कर चली गईं। उनके इस कदम से वहां मौजूद लोगों में चर्चा शुरू हो गई कि आखिर मंच पर ऐसा क्या हुआ, जिससे नपा अध्यक्ष को कार्यक्रम का बहिष्कार करना पड़ा।
बाद में मीडिया से चर्चा में गायत्री शर्मा ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी ईशांक धाकड़ पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम नगर पालिका परिषद द्वारा आयोजित किया गया था, लेकिन सीएमओ ने सुनियोजित तरीके से मंच पर उनके लिए कुर्सी तक नहीं लगवाई। इतना ही नहीं, सम्मान समारोह के दौरान उनका नाम भी नहीं पुकारा गया, जिससे उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित महसूस हुआ।
गायत्री शर्मा ने इसे केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि महिला जनप्रतिनिधियों के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नारी शक्ति की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ महिला जनप्रतिनिधियों को सरकारी कार्यक्रमों में अपमानित किया जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि वह इस पूरे मामले की शिकायत केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, प्रभारी मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर, भाजपा संगठन और प्रदेश नेतृत्व से करेंगी।
वहीं, सीएमओ ईशांक धाकड़ ने इन आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष मंच पर मौजूद थीं और उनका नाम भी लिया गया था। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद वह कार्यक्रम छोड़कर क्यों चली गईं, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।
गंगा दशहरा जैसे धार्मिक और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े आयोजन में मंच पर हुआ यह सियासी ड्रामा अब शहर की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

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